Musafir hindi

किताबो का सफरनामा

हैल्लो दोस्तों, स्वागत है आपका आज हम आपको मिलवाएंगे एक ऐसे लेखक से जिनको कहानी सुनाने वाले या रचने वाले दादाजी के नाम से जाना जाता है। वे बच्चो के पढ़ने वाली कृतियाँ ज्यादातर लिखते है, अब तक लगभग 500 से भी अधिक कृतियाँ वे लिख चुके है जिसमे शार्ट स्टोरी, संस्मरण, नॉवेल आदि शामिल है। अंग्रेजी भाषा मे लिखने वाले भारतीय लेखक Ruskin bond जिन्होंने महज 17 साल की उम्र में उपन्यास लिखा था जिसका नाम है “Room on the room”। एक ऐसे लेखक जिनको कई अवॉर्ड मिल चुके है जिनके उपन्यास पर आधारित बॉलीवुड फिल्में भी बनी तो चलिए विस्तार से जानते है उनके बारे में।

जीवन


Ruskin का जन्म 19 मई 1934 में कसौली, पंजाब में हुआ था। रस्किन का अपने पिता के साथ गहरा संबंध था। जब वे 6 साल के थे तब उनके पापा जामनगर पेलेस की राजकुमारी को अंग्रेजी सिखाते थे। जिसके बाद रस्किन के पिता Royal arm force में भर्ती हो गए। जिसके बाद रस्किन को मसूरी के बोर्डिंग स्कूल में पढ़ने भेजा गया। जब रस्किन 8 साल के थे तब उनकी माता ने उनके पिता से तलाक ले लिया और एक पंजाबी हिन्दू से शादी कर ली। रस्किन जब 10 साल के हुए तो उनके पिता जो Royal arm force में थे उनकी मौत हो गई। जिससे वे बेहद टूट गए क्योकि वे उनके पिता के बेहद करीब थे।इसके बाद वे अपने स्टेप फादर के साथ रहते थे। रस्किन ने कभी शादी नही की।

शिक्षा


बॉन्ड ने अपनी स्कूलिंग Bishop cotton school, Shimala से की। स्कूल में वे राइटिंग कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेते थे जिसमें वे जीते भी थे और इनाम भी पाया था जैसे की Irwin divinity prize , Hailey literature prize. हाई स्कूल के बाद वे अपनी आंटी के वहाँ लंदन चले गए। जहाँ वे दो साल रहे जब उन्होंने अपना पहला उपन्यास लिखा जिसका नाम था “The room on the roof” जिसके लिए ब्रिटिश कॉमनवेल्थ राइटर अंडर 30 के तहत उनको 1957 में John Llewellyn rhys prize मिला।

करियर


रस्किन दिल्ही में फ्रीलांसिंग का काम करके अपने गुजारा करते थे। जिसमे वे न्यूज़ पेपर व मेगेज़ीन में शार्ट स्टोरीज़ व कविता लिखते थे। बाद में वे मसूरी चले गए क्योंकि वो जगह भी बढ़िया थी और वहाँ एडिटर भी उतने थे। वहाँ उन्होंने मेगेज़ीन में 4 साल तक काम किया। 1980 में भारतीय पेंग्विन सेट अप ने उनको कुछ किताबें लिखने को कहा। जिसके बाद उनके उपन्यास पेंग्विन इंडिया पब्लिकेशन द्वारा पब्लिश किए गए। रस्किन का इंटरेस्ट धीरे धीरे नॉन फिक्शन स्टोरीज़ लिखने की ओर बढ़ा जिसके तहत उन्होंने घोस्ट स्टोरीज़ लिखी। जिसके बाद उन्होंने 50 से भी जयादा किताबे बच्चों के लिए लिखी। उनका कहना है कि अगर मैं एक प्रोफेशनल राइटर न बनता फिर भी में लिखना जरूर चालू ही रखता।

फ़िल्म


1978 में आई बॉलीवुड फिल्म जुनून रस्किन की ऐतिहासिक नॉवेल “A fight of pigeons” पर से बनी जिसके प्रोड्यूसर शशि कपूर और निर्देशक श्याम बेनेगल थे। उनके रस्टी स्टोरीज़ पर दूरदर्शन में tv सिरीज़ भी बनी। उनकी कई कृतियों को भारतीय स्कूल के Curriculum में जगह मिली जैसे The night train at Deoli, Time stops at shamli. 2005 में रस्किन की सुप्रख्यात बच्चो के लिए लिखी गई नॉवेल The blue umbrella पर मशहूर निर्देशक विशाल भारद्वाज ने फ़िल्म भी बनाई, जिसे नेशनल अवॉर्ड फ़ॉर बेस्ट चिल्ड्रन फ़िल्म का खिताब मिला। रस्किन की शार्ट स्टोरी Sussanna’s seven husband पर से सात खून माफ फ़िल्म बनी।

अवार्ड्स


● 1957 में John Llewellyn Rhys Prize
● 1992 में साहित्य अकेडमी अवॉर्ड
● 1999 में पद्म श्री
● 2014 पद्म भूषण

तो दोस्तो इनसे हमे सीखना चाहिए कि अपना काम निरन्तर करते रहना है। आपको यह आर्टिकल कैसा लगा यह कमेंट कर जरूर बताएगा फिर मिलेंगे नए आर्टिकल के साथ। धन्यवाद।

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