Musafir hindi

किताबो का सफरनामा

पुस्तक शीर्षक – धर्मयोद्धा कल्कि

लेखक – केविन मिसेल

अनुवादक – रचना भोला ‘यामिनी’

प्रकाशक -फिंगरप्रिंट

मूल्य -250 रु

हेलो दोस्तो ! आज हम 2017 की राष्ट्रीय बेस्ट सेलर रही केविन मिसल द्वारा लिखित कल्कि ट्राइलॉजी की प्रथम किताब धर्मयोद्धा कल्कि के हिंदी संस्करण की समीक्षा करने जा रहे है। सबसे पहले तो यह बताना चाहता हूँ पाठकों की हम जिस विष्णु भगवान के दशावतार के कल्कि अवतार को जानते है जब पाप सृष्टि के चारों कोर फैला होगा जब सत्य केवल एक प्रतिशत रहेगा तब कल्कि अवतरित होंगे और पाप को मिटाकर सतयुग की शुरुआत करेंगे। इससे सम्पूर्ण अलग है केविन मिसल की किताब का कल्कि या यूं कहना उचित होगा कि यह किताब मायथोलॉजी और फैंटेसी फिक्शन का मिश्रण है। मूलतः अंगेजी भाषा में लिखी गई यह किताब का हिंदी अनुवाद प्रसिद्ध अनुवादक यामिनी रचना भोली ने किया है। इसका अनुवाद काफी अच्छा है। हाँ, कई जगह मुहावरे गलत लिखे गए है जिसे सुधारा जा सकता है। इसका प्रथम भाग ही हिंदी में अनुदित है दूसरा भाग शायद 2021 में पढ़ने को मिले।

अब बात करते है कथानक की इस उपन्यास में दो प्रतिनिधि नायक है सत्य का प्रतिनिधि कल्कि जो सम्भल गाँव के विष्णुयश तथा सुमति का पुत्र है जो अपनी प्रेमिका लक्ष्मी एवम अपने भाई अरजन के साथ अपने असाधारण तत्व के साथ जी रहा है वही पाप का प्रतिनिधि नायक काली एक मिशन पर निकला है जहाँ वह एक षड्यंत्र का शिकार होते हुए मौत के मुख के करीब आकर खड़ा हो जाता है और अपने भाई के प्राण बचाने के लिए राजकुमारी दुरक्ति कुछ भी कर गुजरने को तैयार थी तभी उसे पता चलता है सम्भल गाँव में सोमरस है जो उसके भाई को एक नया जीवन दे सकता है और यही से शुरुआत होती है सत्य और पाप के बीच का मल्ल युद्ध जिसमें कई षड्यंत्र, छल कूटनीति शामिल है।

इस उपन्यास को पढ़ते वक्त मुझे कई जगह गेम ऑफ थ्रोन का प्रभाव लेखक पर है यह महसूस हुआ पर लेखक ने शुरू में ही यह बता दिया था कि उन पर गेम ऑफ थ्रोन का प्रभाव है जिससे हम इसे प्रेरणारूप मानकर नजरअंदाज कर सकते है। ट्राइलॉजी होने के कारण पात्र की संख्या ज्यादा है और हर एक पात्र अपनी छाप छोड़ता है चाहे वे कुबेर हो पद्मा हो या दुरुक्ति सब पाठक के मन में भीतर तक उतरते है। मुझे सबसे अधिक अरजन का पात्र भाया क्योंकि उस पात्र के कई सारे अच्छे एवं बुरे दोनों गुण मुझे प्रभावित किया। लेखक की वर्णन शैली अद्भुत है पर पात्रो के संवाद की कमी अधिक है और इतने प्रभावशाली भी नही है। अगर आप कुछ नया पढ़ना चाहते है तो यह किताब आपको भायेगी पर अगर आप मंझे हुए पाठक है तो आपको यह निराश भी कर सकती है। लेखक और प्रकाशक दोनों को भविष्य के लिए शुभकामनाए।

आर्यन सुवाड़ा ।

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