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पुस्तक शीर्षक : नरकंकाल

लेखक : साबीरखान पठाण

भाषा : गुजराती

प्रकाशक : शोपिज़न

मूल्य : 35 रु

हैल्लो दोस्तों ! तो चलो चलते है एक नए सफर पर। आज हम जिस बारे में बात करने जा रहे है उसे सुनकर आपके दिल की धड़कनें तेज़ रफ्तार से चलने लगेगी मानो रेस की कार, कुछ ऐसा जिसे पढ़कर आपके रौंगटे खड़े हो जाये, साँसे अटक सी जाए और दिल ईयूफोरिक स्टेट में चला जाये। एक दिल दहलाने वाला मंजर, एक खौफनाक रात, घटादार वृक्षो से घिरा पहाड़ी इलाका और वनवासी लोगों की रहस्यमय प्रवृतियों की भरमार के साथ आज हम बात करेंगे हॉरर किंग साबीरखान पठाण की नॉवेल “नरकंकाल” के बारे में।
नरकंकाल ! नाम ही दर्शाता है कि यह कितनी रोमांचित होगी। इस नॉवेल में न सिर्फ आपको भयानक मंज़र देखने को मिलेगा बल्कि ये आपको एक ऐसे सफर में ले जाएगी जहाँ आपको आदिवासी भाषा, पहनावा और उनकी वो दिल दहलाने वाली अजीब सी हरकते या यूं कहो कि प्रवृतियाँ देखने को मिलेगी। इसके साथ साथ आये दिन समाचारो में दिखाए जा रहे ढोंगी बाबा जो नरकंकाल के ढेरों में जाता है। अगर मैं ये कहूँ की आत्माए होती है तो शायद आप मे से कुछ लोग इंकार कर सकते है लेकिन तब तक जब तक की आपने नरकंकाल न पढ़ी हो।
पूरा कथानक एक लड़की जो है इंद्रा के साथ होने वाली भयानक घटनाओ से बुना हुआ है।शुरुआत में देखे तो एक शर्मनाक और घिन्न भरी घटना घटती है। शुरुआत से ही भय ने अपना डेरा बनाये रखा होता है धीरे धीरे कथा प्रवाह के साथ इंद्रा के साथ अजीब अजीब सी घटनाएँ घटने लगती है उसे कुछ सपने आते है जो सपने है या सच ? उनका क्या मतलब है ? उसके साथ ही ऐसा क्यों हो रहा है ? क्या उसमे कुछ खास है जो किसी और में नही ? यही ढूँढते हुए वो और उसका दोस्त या यूं कहें कि आशिक राजवीर दोनों उस खौफनाक जगह पर पहुँच जाते है मेरे हिसाब से वही से शुरू होता है असली खेल। एक ऐसा खेल जिसमे ना तो किसी पर दया दिखाई जाती है और ना ही किसी को बक्षा। ये सोचना मुश्किल है कि आगे क्या होगा रहस्यमयता के साथ डर अपने चरम पर होता है।

मेरे विचार से यह नॉवेल एक ट्रेजर गेम की तरह है जहाँ पर आपके पास कोई पज़ल है और आपको उसे सुलझाना है। तो दोस्तो तैयार हो जाइए और सुलझाये इनके खोफ और रोमांच से भरे पज़ल। और यह समीक्षा आपको कैसी लगी कमेन्ट करके जरूर बताइएगा। मिलेंगे फिर एक नए सफर के साथ।

बेहद खुशी की बात है कि साबीरखान पठाण की नॉवेल कालकलंक जल्द ही फलयड्रीम द्वारा हार्ड कॉपी में प्रकाशित होने वाली है उसके लिए बधाइयाँ। मेरी दरख्वास्त है कि जरूर पढ़ें। आशा करते है कि नरकंकाल और कब्रस्तान भी जल्द ही हार्ड कॉपी में आप सबके सम्मुख आए। तब तक के लिए नीचे दी गई लिंक से नरकंकाल का मजा उठाए। धन्यवाद।

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