Musafir hindi

किताबो का सफरनामा

पुस्तक शीर्षक : मर्डर ऑन वेलेंटाइन्स नाईट

लेखक : विजय कुमार बोहरा

प्रकाशन : सूरज पॉकेट बुक

पृष्ठ : 196

प्रकार : उपन्यास

मूल्य : 160 रु

हेलो दोस्तों! स्वागत है आप सभी का आपके अपने ब्लॉग मुसाफिर हिंदी में। आज हम जिस किताब पर चर्चा करने वाले है उसका नाम है “मर्डर ऑन वैलेंटाइन्स नाईट” जिसे लिखा है विजय कुमार बोहरा जी ने। यह उनकी प्रथम किताब है वे पेशे से गर्वमेंट टीचर है और उदयपुर में रहते है।

इस किताब का रिव्यू करने से पहले एक बात अवश्य कहना चाहूँगा कि हर किताब का अपना एक पाठक वर्ग होता है। शायद मैं इस किताब का पाठक नही था, इसलिए यह किताब ने मुझे निराश किया। कहानी में कुछ नयापन नही है पुस्तक के शीर्षक से पता चलता कि वेलेंटाइन वाली रात एक मर्डर होता जिसका केस उदयपुर के मशहूर प्राइवेट डिटेक्टिव साकेत अग्निहोत्री के पास आता है। जो इस केस को सॉल्व करने कोशिश में लग जाता है पूरा उपन्यास का कथानक इसी जासूस के ईदगिर्द ही चलता है।

अब बात करते है इस उपन्यास के गुण दोष की तो सबसे पहले अच्छी बात देख लेते है।

1. लेखक ने एक जासूस किस तरह काम करता है किस तरह सोचता है उसे बखूबी अच्छी तरह से दिखाया है।

2. लेखक ने पूरी तरह इसे यथार्थ से जोड़ने की कोशिश की है कोई ड्रामा या मार धाड़ वाले दृश्य नही दिखाया।

3.इस उपन्यास का पात्र सौरभ बेहद रोचक पात्र है पर उसका उपयोग सही तरीके से नही किया गया। शायद लेखक आगे जाकर इसी पात्र पर एक और उपन्यास का सृजन करे तो कोई नही बात नही होगी।

अब बात करते है इसके दोष पर

1. सबसे पहले तो कथानक में कुछ नया नही है।

2. यह किताब पाठकों का संयम मांगती है। बहुत धीमा कथानक है कुछ हल्के फुल्के ट्विस्ट है पर वो भी कथानक को गति नही दे पाते।

3. सौरभ को छोड़कर किसी भी पात्र के साथ न्याय नही किया गया बस उसके ऊपरी आवरण को ही बताया गया है।

4. अंत बेढंगा और निराशाजनक है।

यह मर्डर ऑन वेलेंटाइन नाईट किताब के गुण एवं दोष थे जो कि मुझे लगे। इस लेख के सभी विचार मेरे निजी है। मैंने पहले भी कहा कि शायद यह मेरे तरह की किताब नही थी। चलिए फिर मिलेंगें एक नई किताब के साथ तब तक के लिए अलविदा।

आर्यन सुवाड़ा

3 thoughts on “पुस्तक समीक्षा: मर्डर ऑन वेलेंटाइन्स नाइट book review

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