Musafir hindi

किताबो का सफरनामा

पुस्तक शीर्षक – मेलूहा के मृत्युंजय

लेखक – अमिश त्रिपाठी

अनुवादक – विश्वजीत सपन

प्रकाशक – वेस्टलैंड , एका

मूल्य -268 रु

हेलो दोस्तों, स्वागत है आपके अपने ब्लॉग मुसाफिर हिंदी में । आज हम जिस किताब की समीक्षा book review करने जा रहे वह है मायथोलॉजी फिक्शन में अपनी अलग ही पहचान बनाने वाले ‘ the Amish tripathi की पहली ही किताब मेलुहा के मृत्युंजय के मेरे अनुभव को आप से साझा करूँगा।

अमिश त्रिपाठी मूल अंगेजी साहित्यकार है जिन्होंने अपनी प्रथम किताब शिवा ट्राइलॉजी shiv trilogy से ही कि थी जिनकी प्रथम किताब immortal of meluha ( मेलुहा के मृत्युंजय ) थी हाँ यह किताब सेल्फ पब्लिशिंग थी बाद में इसकी लोकप्रियता देखकर वेस्टलैंड पब्लिकेशन westland publication ने इसे खरीद लिया था फिर लेखक ने शिव त्रय में ही ‘नागाओं का रहस्य’ ( secret of nagas ), वायुपुत्रों की शपथ ( ouath of vayuputras ) प्रकाशित की फिर रामचंद्र सीरीज में ‘इंशवंकु के वंशज राम’ , ‘मिथिला की योद्धा सीता ‘, ‘आर्यावर्त का शत्रु रावण ‘ फिर नॉन फिक्शन में अमर भारत और हाल में ही आई सुहेलदेव । अमिश की लेखनी पाठको को इतनी पसंद आई है कि वे भारत के जाने माने साहित्यकारों में से एक है उन्होंने मायथोलॉजी फिक्शन में अपना लोहा मनवाया है ।

अब बात करते मेलूहा के मृत्युंजय किताब के बारे में तो इसका हिंदी अनुवाद किया है विश्वजीत सपन जी ने और लाजवाब अनुवाद है । मेलूहा के मृत्युंजय का कथानक शिव कथा पर आधारित है की किस तरह एक साधारण मनुष्य लाखों लोगों के लीए ईश्वर बनता है उसकी गाथा है मेलूहा के मृत्युंजय । एक बात स्पष्ट कर दु की इस किताब के शिव और हमारी आस्था के शिव में अंतर है । अमिश की लेखनी में हमेशा मानवतावाद और वैज्ञानिक पद्धति को महत्व दिया गया है जबकि पौराणिक चमत्कारों वाले शिव इस कथा के लोकनायक नही अपितु एक साधारण मनुष्य है जो अपने गण कबीलों को एक बेहतर जीवन देने के लिए समृद्ध साम्राज्य मेलूहा में प्रस्थान करते है जहाँ पर शिव को सोमरस दिया जाता है और उनका कण्ठ नीले रंग का हो जाता है । जिससे मेलूहा वासी उन्हें ईश्वर मान लेते है जो मेलूहा वासी के दुःखो का नाश करके उन्हें मुक्ति दिलाएंगे । अब समृद्ध मेलूहा का क्या दुख है , शिव कैसे उनके दुख का निवारण करेंगे यह जानने के लिए आप को उपन्यास पढ़ना पड़ेगा ।

अब बात करते कथा के पात्र चरित्र की तो पौराणिक गाथा के ही पात्र इस उपन्यास के पात्र है जैसे शिव, नंदी, सती, काली,बृहस्पति आदि आदि हर पात्र के चरित्र को बखूबी लेखक ने लिखा और पाठक के मन मस्तिष्क पर अपनी छाप अवश्य छोड़कर जाता है। अब बात करते है संवाद की तो संवाद काफी अच्छे है लेखक ने अपनी फिलॉसफी ज्यादातर संवादो के माध्यम से कही है। इसलिए कही जगह पर संवाद लंबे हुए है जो चल सकता है सबसे बहेतरीन संवाद अंतिम युद्ध मे शिव अपनी सेना को भाषण देता है वह आपको भाव विभोर कर देता है ।

अब बात करते है की किताब मुझे कैसी लगी तो मायथोलॉजी फिक्शन और फंतासी फिक्शन हमेशा से मेरा फ़ेवरिट रहा है और यह किताब दोनो का मिश्रण है तो मुझे तो यह किताब बेहद पसंद आई और इसका दूसरा भाग ‘नागाओ का रहस्य ‘ अवश्य पढूंगा । अगर आप शिव को मानव रूप में पढ़ना चाहते है तो यह किताब आवश्य पढ़े और जो शिव के चमत्कारिक रूप में विश्वास रखते है शायद उन्हें यह किताब पसंद न आए । फिर मिलते है एक नए किताब के रिव्यु के साथ तब तक के लिए अलविदा ।

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