Musafir Hindi

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हाथो से फिसलती रेत सा ये वक्त
कब कोनसा वक्त दिखाए क्या पता?

तेरे दामन से जुड़ा हूँ इस तरह मैं
कब छूट जाए क्या पता?

कमबख्त एकतरफा ये ईश्क मेरा
कब मजनू बना दे क्या पता?

तेरी बन्दगी और तेरी आशिकी
कब मुजे परवाना बना दे क्या पता?

बस तेरी एक हाँ की देरी है वरना
कब ये साँसें रुख मोड़ ले क्या पता?

-राधेय

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