Musafir hindi

किताबो का सफरनामा

पुस्तक शीर्षक – कालरात्रि

लेखक – पूजा त्रिवेदी रावल

प्रकाशन – शोपिज़ेन

मूल्य -20 रु

भाषा -गुजराती

हैल्लो दोस्तो, आज हम आपके लिए लेकर आये है एक नई कहानी का रिव्यू जो करुणासभर है। लोग कमाते है, अपना घर चलाते है लेकिन जब लॉकड़ाउन जैसी परिस्थियाँ हो तो कैसे कमाएँ और बिना कमाए खाये कैसे? यह सबसे कठिन परिस्थिति हो जाती है। मध्यम वर्गीय लोगो के लिए यह सबसे कठिन रहता है। चूंकि उनका स्वाभिमान व कुछ मनमे गड़े पुराने विचार के तहत हाथ फैलाने से कतराते है। कुछ ऐसी ही परिस्थितियों का अहसास लेकर आज हम लेकर आये है “कालरात्रि” नॉवेल का रिव्यू जो कि लेखिका “पूजा त्रिवेदी रावल” द्वारा लिखा गया है। यह कहानी गुजराती भाषा में लिखी गयी है जो कि शोपिज़न एप पर उपलब्ध है।

कहानी की मुख्य नायिका रूपल है। कहानी की शुरुआत रूपल की नौकरी जाने से होती है, जिसके बाद उसके जीवन में भूचाल आता है। वह एक सिंगल मधर होती है चूंकि उसके पति की मृत्यु हो जाती है तो वह अकेले ही अपने दोनों बच्चो को संभालती है। जैसा कि हमे ज्ञात है कि पिछले कुछ महीनों से जो लोगो की हालत हुई है इस महामारी के कारण उसे लफ्जो में कह पाना मुश्किल है। कहि न कही हमे पता है कि मध्यम वर्ग एक ऐसा वर्ग है जो ना तो ठीक से जी पाता है और ना ही मर पाता। पैसे जोड़ जोड़ कर जो भविष्य संवारने के सपने देखता है उस पर ये लॉकडाउन गहरी खाई का काम करता है। ये एक ऐसा वर्ग है जो अपने स्वाभिमान को ठेस न पहुँचाने के विचार से किसी की मदद लेने से कतराते है। कुछ ऐसी ही हालत इस कहानी की नायिका की है। उसके दो बच्चे भी होते है जो अपनी माँ का हर मुश्किल में साथ देते है। रूपल की नोकरी जाने के बाद उसने बहोत कोशिश की के कुछ काम मिल जाये पर वह नाकाम रही। आखिरकार उसे आत्महत्या का एक विचार आया। क्या रूपल आत्महत्या करेगी? क्या रूपल को फिर से नौकरी मिल जाएगी? क्या वे लोग इस दलदल से बहार निकल पाएंगे या भूख मरे से हार जाएंगे? क्या रूपल इस परिस्थिति का सामना कर पायेगी? क्या उनको जीवन जीने की नई किरण मिलेगी या वे इस कालरात्रि में गुम हो जाएंगे? जानने के लिए जरूर पढ़ें कालरात्रि।

लेखिका ने पूरी कहानी लॉकडाउन की सच्चाई को समझ उसके तार जोड़ जोड़ के बनाई है। उन्होंने बखूबी दिखाया है कि लोगो की क्या हालत हुई थी इस कपरे काल मे। पूरी कहानी में हमे रूपल का संघर्ष दिखाई देता है। इस भीड़ भरी दुनिया मे तालाबन्दी जैसे समयकाल में कैसे लोग अनाज के दाने दाने के लिए तरस रहे थे कैसे लोगो की हिम्मत जवाब देती थी उसका करुनामय चित्रण लेखिका ने रूपल के जरिये दिखाया है। साथ ही मानवता अभी भी बची है उसका भी एक सुंदर उदाहरण दीपेन भाई के रूप में दिखाया है। जो हर कठिन परिस्थितियों में अपनी मुँह बोली बहन का साथ नही छोड़ता और उसकी हिम्मत बढाता है।

इस कहानी को जरूर पढ़ें जो सही मायनों में हमे बताती है कि जीवन संघर्ष का दूसरा नाम है। परेशानी तो हर किसी के जीवन में आनी ही है लेकिन इंसानियत के नाते हमें एक दूसरे की मदद करनी चाहिए। एक दूसरे का साथ देकर एकदूसरे को हौसला देने से हम इस महामारी में अपना अस्तित्व बचा सकते है। धन्यवाद।

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