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किताबो का सफरनामा

हैल्लो दोस्तों, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग musafirhindi.com पर आज हम लेकर आये है Book Review “जोकर के दो आगे जोकर” शुभानंद जी द्वारा लिखित रहस्यमय, थ्रिलर, रोमांचक व एक्शन से भरपूर उपन्यास। पहले तो मैं आपको यह बताना चाहूँगी की यह उपन्यास On Public demand है। जी हाँ पब्लिक डिमांड शुभानंदजी द्वारा लिखा गया फेमस किरदार जोकर जिस पर उन्होंने उपन्यास लिखा वह पाठको को इतना पसंद आया कि जोकर पर एक और कहानी लिखने की डिमांड की गई। पब्लिक कहे और शुभानंद जी ना माने ऐसा तो हो नही सकता तो यह उपन्यास आपके सामने है। “जोकर के दो आगे जोकर” अबूझमाड़ मिशन के साथ। यह उपन्यास Bookemist (इम्प्रिन्ट- सूरज पॉकेट बुक्स) द्वारा प्रकाशित किया गया है जो आपको Amazon Kindle पर भी मिल जाएगा।

चलते है कहानी की और तो इस कहानी की शुरुआत जेल से होती है जहाँ जोकर मिशन के लिए एक साथी को ले जाने गया है। अजीत एक खूंखार मुजरिम जो अबूझमाड़ जंगल दो बार जा चुका है लेकिन कभी मिशन में सफल नही हो पाया। जोकर अजीत को जेल से छुड़ा ले जाता है। चंदन भागने में घोड़े जैसा तेज़ वह भी इस मिशन का हिस्सा होता है। जोकर जो कि अन्नदाता के लिए काम करता है जो इनको मिशन की तैयारी की चीज़ें पहुँचाते है। मिशन होता है बरसो पहले सोने से भरा एक मिनी ट्रक जो किसी कारण अबूझमाड़ जंगल मे गिर जाता है जिसे जोकर और उसके साथी को लेकर आना है। फिर शुरू होती है मिशन की तैयारी जिसमे दौड़ना, एक खास प्रकार के कपड़े, कैमाफ्लाज, मेक अप आदि शामिल है। फिर शुरू होता है असली खेल ! अबूझमाड़ जंगल जहाँ जानवरो से भी ज्यादा खतरा नक्सलाइट्स का होता है। नक्सली के इलाके में जाना मतलब जान से हाथ धोना। कैसे जोकर और उसके दोनों साथी अबूझमाड़ पहुँचेंगे? क्या वे अपनी जान नक्सली से बचा पाएंगे? क्या वे इस मिशन को पार कर पाएंगे? क्या सोने से भरा ट्रक लेने जान जोखिम में डालना सही है ? क्या असली मिशन यही है या कुछ और राज है? कैमाफ्लाज क्या है? आखिरकार सोने की ऐसी क्या जरूरत पड़ गई कि बरसो बाद उसे निकालने के लिए नक्सलियों से भिड़ना पड़े? जानने के लिए जरूर पढ़ें ‘जोकर के दो आगे जोकर’।

मिशन पे जोकर, जोकर के दो आगे, जोकर दो पीछे जोकर, बोलो कितने जोकर? हुक्म का इक्का सबसे बड़ा उससे भी बड़ा जोकर ! कहानी शुरू से ही रोमांचित है। लेखक ने एक भी पॉइंट ऐसा नही छोड़ा की पाठक को कहानी स्लो लगे या बाद में पढ़ने का सोचे। जबरदस्त लेखनी के साथ कहानी को कुछ इस तरह बुना गया है कि पाठक एक साथ इसे पढ़ने को मजबूर हो जाएगा। जोकर का किरदार बेहिसाब है जो विदेशी होने के बावजूद अच्छी हिंदी बोल लेता है और वह इस मिशन का मास्टर प्लानर है। हाँ, मास्टर माइंड नही क्योंकि मास्टर माइंड कोई और ही है। चंदन का किरदार युवा होने के साथ ही नक्सली की भाषा का जानकार है जो तेज भागता भी है और पेड़ो पर फुर्ती से पलक झपकते चढ़ सकता है। अजीत और सुजीत की जोड़ी भी कमाल की है। सुजीत के बारे में जानने के लिए आपको नॉवेल पढ़नी है।

लेखक के नकारात्मक किरदार बेहद फेमस है जैसे ‘कमीना’ का “अभिषेक मिश्रा” व ‘जोकर जासूस’ का “जोकर” जो कि आज एक नई कहानी के रूप में हम सब के सामने है। शुभानंदजी 09 सालों से निरंतर लेखन कार्य से जुड़े है। अब तक करीबन 15 मुख्य किताबे आ चुकी है। वे सीरीज भी लिख चुके है जैसे “राजन इकबाल रेबोर्न” व “जावेद अमर जॉन” शामिल है। जिसे पाठकों से भरपूर प्यार मिला।

मेरे हिसाब से जोकर का किरदार आपको बेहद प्रभावित कर सकता है जैसे अब मेरा तो फेवरिट बन चुका है। ऐसा किरदार जो कि एक विदेशी जासूस जो कुछ कारणवस अपराधी बन गया। साथ ही हुनर से भरपूर। तो दोस्तो इस किरदार को जानने व अबूझमाड़ मिशन का हिस्सा बनने जरूर पढ़ें “जोकर के दो आगे जोकर”। अगर आपको हमारा रिव्यू पसन्द आया तो कमेंट कर जरूर बताएँ और ज्यादा से ज्यादा लोको तक जरूर पहुँचाए। धन्यवाद।

— सीमा बगड़ा

2 thoughts on “‘जोकर के दो आगे जोकर’ पुस्तक समीक्षा book review hindi edition

  1. bahut badhiya samiksha di hai bhai utsukta badh gayi hai ab to waise abHi joker jasus padh hi raha hu

  2. बढिया समीक्षा, लगता है अब तो किताब पढ़ ही लूं।

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