Musafir hindi

किताबो का सफरनामा

हैलो दोस्तों, आज हम लाये है उपन्यास की समीक्षा जिसका नाम है जा चुड़ैल जो कि देवेंद्र पाण्डेय द्वारा लिखा गया है। देवेंद्र जी उमदा लेखक है जो हर बार एक नए जॉनर के साथ आते है। इस बार उन्होंने जा चुड़ैल जाहिर है हॉरर कहानी में हाथ आजमाया है। जा चुड़ैल नाम से ही हमे यह तो ज्ञात हो जाएगा कि इसमें चुड़ैल होगी लेकिन लेखक ने सलीके से हॉरर में कॉमेडी का तड़का दिया है जो वाकई काबिले तारीफ है।

उपन्यास की कहानी कुछ इस प्रकार है, सबसे पहले तो रामजस नामक आदमी से हमारा परिचय होगा पहला आदमी जो भूतों से बच गया। बाद में एंट्री होती है हमारे हीरो प्रीतम की, लेकिन यह कोई फिल्मी हीरो नही यह तो एक सीधा सादा मिडल क्लास इंसान है जो खुद ही अपनी कहानी बताते हुए नजर आएगा जो कि पूरी ईमानदारी से बताता है मेरा मतलब अपना फुद्दूपन भी। मुम्बई की बरसात के कारण बाढ़ जैसी स्थिति में प्रीतम सोनल से मिलता है, उसे बचाता है लेकिन सोनल का बर्ताव कुछ अलग ही होता है परिस्थिति के हिसाब से उसका रिएक्शन कुछ अलग ही होता है। अब यह दिमागी बीमारी है या उसका व्यक्तित्व ही ऐसा है यह कह पाना मुश्किल है। प्रीतम का दोस्त केशव जो पेरानॉर्मल एक्टिविटी में विश्वास और घोस्ट हंटर बनने की चाह रखता है वह भी एक अहम हिस्सा है इस कहानी का। अखंड सिंगल प्रीतम जब सोनल के गाँव जाता है तो उस भूतियाँ गाँव मे उसका मुकाबला चुड़ैल और भूतों से होता है। क्या होगा जब प्रीतम भूतों से मिलेगा? क्या वो जीवित बच पायेगा? क्या सोनल कोई चुड़ैल है या उसे दिमागी बीमारी है? क्या केशव घोस्ट हंटर बन पाएगा? इन सवालों का जवाब पाने आपको पढ़नी है नॉवेल जो है जा चुड़ैल।

केरेक्टर बेहतर है। सोनल जिसका व्यक्तित्व हमे सोचने को मजबूर कर देगा कि वह बचपन से ऐसी है कोई दिमागी बीमारी है या सच मे कोई चुड़ैल है। केशव जो कि फालतू का सस्पेंस क्रिएट करने में एक्सपर्ट और मैन केरेक्टर प्रीतम जो की अपने साथ बनी कॉमेडी घटना भी इस तरह बताता है कि पाठक अपनी हंसी न रोक पाए।

शुरुआत में कहानी थोड़ी स्लो है। धीरे धीरे कथानक आगे बढ़ता है लेकिन जब प्रीतम गाँव मे पहुँचेगा तब से कहानी की रफ्तार तेज हो जाएगी जो कि पाठक को पूरी कहानी एक साथ पढ़ने को मजबूर कर देगी। देवेंद्रजी का कथानक व लिखने का तरीका बेहतरीन है। उन्होंने यह कहानी प्रीतम के जरिये कही है जो कि एक बढ़िया विचार है। केरेक्टर बढ़िया चुने है। वर्णन अच्छा है जो पढ़कर आपको लगेगा कि दृश्य आपके सामने चल रहा हो। कुल मिलाकर कहानी बेमिसाल है हाँ अगर आप ज्यादा बढ़ा चढ़ा के परोसा गया मसालेदार लेखन पढ़ने वाले पाठक हो तो शायद यह कहानी आपको निराश कर सकती है।

मुझे तो यह कहानी बढ़िया लगी। आप भी इसे पढ़े और यह रिव्यू आपको कैसा लगा यह कमेंट कर जरूर बताए। धन्यवाद।

2 thoughts on “जा चुड़ैल पुस्तक समीक्षा book review। hindi edition । publication

  1. उपेंद्र नाथ अश्क कहते थे, सीधा सच्चा लिखोगे, तब बढिया लिखोगे। अधिक मसाला कई बार स्वाद बिगाड़ देता है। लगता है, अब इस किताब को पढ़ना होगा।

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