Musafir hindi

किताबो का सफरनामा

हेलो दोस्तों स्वागत है आपके अपने ब्लॉग मुसाफ़िर हिंदी में । आज हम छोटी सी मुलाकात में रूबरू होंगे हाल ही में फ्लाईड्रीम से प्रकाशित हुई अर्थव और मायालोक के लेखक मनीष पांडे रुद्र जी से। अर्थव और मायालोक मनीष जी की प्रथम पेपरबैक किताब है पर मनीष जी लेखन में नए नही है यह ओडियो प्लेटफॉर्म , ब्लॉग और प्रतिलिपि पर बहुत समय से लिख रहे है । आइये मनीष जी से उनकी किताब और उनके बारे में जानते है।

1.अपने बारे में बताईए कि आप हैं कहाँ से और अपना संक्षिप्त परिचय दीजिए?

Ans. मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर बलरामपुर से हूँ। अभी हाल ही मैं ग्रैजुएशन कम्पलीट किया है और स्टेट लेवल की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा हूँ। एक लेखक के तौर पर मैं फैनमेड स्टोरीज के पेजेस, Kuku Fm, ब्लॉग्स और प्रतिलिपि जैसी ऑनलाइन प्लेटफार्म पर एक लम्बे अर्से से कार्य कर रहा हूँ, मगर प्रकाशित लेखक के तौर पर यह मेरी पहली नॉवेल है। उम्मीद है ‘अथर्व और मायालोक’ पाठकों को पसंद आएगी।

2.लेखन की शुरुआत कहाँ से हुई और आपको लेखन मैं रुचि कैसे जागी ?

Ans. ये सवाल मजेदार है दरअसल पता नहीं क्यों पर बचपन से मुझे किस्से और कहानियों से एक अलग तरह का लगाव था और लगाव इस हद तक बढ़ गया कि नौ साल की उम्र में मैंनें अपनी पहली कहानी लिखी थी।
घरवालों और दोस्तों को पढ़ाया, मेरे बचपने को देखते हुए सभी ने तारीफ की और उन तारीफों ने आज यहाँ तक पहुँचा दिया।
हाँ एक बात और हॉरर और फंतासी से मुझे सबसे ज्यादा लगाव है।

3.अर्थव और मायालोक पहली ही किताब फंतासी फिक्शन और 388 पेज इसे लिखने की प्रेरणा कहा से मिली ?

Ans. देखिए मेरा मानना है कि पिक्चर की शुरुआत धमाकेदार होनी चाहिए पिक्चर देखने का मजा तभी आता है। एक लेखक के तौर पर मेरे लिए पेज मायने नहीं रखता बस कहानी पर्याप्त होनी चाहिए और जहाँ तक प्रेरणा की बात है तो अथर्व के लिए प्रेरणा मिली मुझे हैरी पॉटर और नारनिया जैसी स्टोरीज से।
आपमें से अधिकतर पाठक इन दोनों ही उपन्यासों के बारे में जानते ही होंगे। बात यह है कि आज के सात-आठ साल पहले मैंने ये दोनों उपन्यास अंग्रेजी भाषा में पढ़ी थीं। इसके बाद मैंने सोचा कि काश इसी तरह कुछ हिंदी में भी पढ़ने को मिले पर अफसोस कि आज सात साल बीत जाने पर भी मैंनें हिंदी भाषा की ऐसी कोई नॉवेल ही नहीं देखी जिसकी तुलना मैं इन दोनों उपन्यासों से कर सकूँ और तब मैंनें ‘अथर्व और मायालोक’ की रचना की, हालांकि इसकी परिकल्पना मैंने हैरी पॉटर पढ़ने से पहले ही की थी।

4.अपनी किताब ‘अर्थव और मायालोक’ के बारे मे बताइये ?

Ans. अथर्व और मायालोक के बारे में बताने से पहले मैं अपने प्रकाशक ‘फ्लाईड्रीम्स पब्लिकेशन्स’ को ढ़ेर सारा धन्यवाद करना चाहूँगा जिन्होंने मुझे यह मौका दिया और साथ ही पाठकों की ओर से भी धन्यवाद करूँगा जो नित नई विधा के उपन्यास ला रहे हैं।
बहरहाल, अथर्व की बात करूँ तो यह कहानी है एक अनाथ लड़के की जो पूरी शिद्दत से अपने माता-पिता की खोज में लगा हुआ था और उसकी यह खोज उसे लेकर जाती है मायालोक में जहाँ पहुँचकर उसे यह पता चलता है कि उसका अस्तित्व उसी मायालोक से जुड़ा है और वहाँ उसे मिलते हैं नरपशु। जिनमें से कुछ उसके साथ हैं और कुछ खिलाफ।
लगभग चार सौ पेजेस की इस लम्बी कहानी में आपको ढ़ेर सारा जादू, रोमांस, सस्पेंस और बेहतरीन एक्शन भी देखने को मिलेगा।

5.हिंदी साहित्य हमेशा सामाजिक उपन्यास को महत्व देता आया है, जहाँ आप अपनी प्रथम ही किताब फंतासी ला रहे हैं। मेरे हिसाब से यह जरूरी भी है कि इस तरह के विषय को लाया जाए हिंदी में फिर से। पर क्या आपको लिखते वक्त यह लगा था कि यह छपेगी भी की नही ?

Ans. जी आपने बिल्कुल सही कहा कि हिंदी साहित्य में इस जॉनर के अंतर्गत ऐसा कुछ भी नहीं मिलेगा जो मैं एक फंतासी पढ़ने वाले को रिकमेंड कर सकूँ। यह देखकर मुझे बहुत दुख होता है कि लेखक लीक छोड़कर कुछ नया लिखना ही नहीं चाहते मगर मुझे खुशी है कि फ्लाईड्रीम्स पब्लिकेशन्स इस बारे में काफी अच्छा और सराहनीय प्रयास कर रहा है। पर फिर भी अगर मैं ये कहूँ कि हिंदी साहित्य में फंतासी का अकाल है तो यह बिल्कुल भी अतिश्योक्ति नहीं होगी और मैं बस इसी चीज को बदलना चाहता हूँ।

6.अथर्व के लिए क्या-क्या तैयारी करनी पड़ी थी। क्या कोई खास शोध कार्य किया था ?

Ans. जी तैयारियाँ बहुत सी करनी पड़ी मसलन कैरेक्टर के नाम से लेकर उनकी गुणवत्ता तक सबकुछ सोचना पड़ा और चूंकि मैंनें नरपशु का कांसेप्ट भगवान नृसिंह जी की कहानी से लिया था जो स्वयं आधे नर थे और आधे सिंह इसलिए लिखने से पूर्व मैंनें इस पर अच्छा खासा शोधकार्य किया बहरहाल मुझे नरभेड़ियो से अधिक इसके बारे में कहीं और कुछ पढ़ने को नहीं मिला और इस तरह मैं अपनी एक स्वतंत्र काल्पनिक दुनिया रचने के लिए पूरी तरह से तैयार हो गया।

7.आपके आने वाले अन्य प्रोजेक्ट कौन से है ?

Ans. एक्चुअली अथर्व के बाद मैं एक और फंतासी नॉवेल पर काम कर रहा हूँ और उम्मीद करता हूँ जल्दी ही यह भी पाठकों के हाथों में आ जाएगी। इसके बाद मेरी तीसरी किताब भी एक सुपरनैचुरल फंतासी नॉवेल होगी जिस पर शोधकार्य जारी है।
हाँ आगे मेरी कुछ हॉरर नॉवेल्स लिखने की भी इच्छा है और एक बढ़िया प्लॉट मिलते ही उस पर भी कार्य शुरू करूँगा।

8.फ्लाई ड्रीम हमेशा हटकर थीम पर अपनी किताबों के लिए जाना जाता है और आपकी किताब भी एकदम हटकर है, तो फ्लाई ड्रीम के साथ कैसा अनुभव रहा ?

Ans. फ्लाईड्रीम्स पब्लिकेशन्स की टैगलाईन ही है “किताबें जरा हटके” और अपने इसी उद्देश्य के साथ फ्लाईड्रीम्स हर बार पाठकों के लिए कुछ नया लेकर आता है। अथर्व और मायालोक भी हिंदी उपन्यास लेखन के क्षेत्र में कुछ हटके किया गया प्रयोग है। अब बस देखना है कि पाठकों को किताब कैसी लगती है।
जहाँ तक बात मेरे अनुभव की है तो सिर्फ मेरा ही नहीं बल्कि इस प्रकाशन से जुड़े सभी लेखकों का अनुभव काफी अच्छा रहा है। फ्लाईड्रीम्स के प्रकाशक अपनी किताबों के लिए उतने ही डेडीकेटेड होते हैं जितने कि लेखक स्वयं और यह एक अच्छी बात है।

10.अर्थव के लिए पाठको को क्या कहना चाहेगे ?

Ans. जाते-जाते अथर्व के पाठकों के लिए मैं कहना चाहूँगा कि इस उपन्यास के रूप में मैंनें कुछ नया करने का प्रयास किया है जो आमतौर पर हिंदी लेखन में नजर नहीं आता। यानी कि विशुद्ध फंतासी मायालोक जैसी एक अनोखी दुनिया, नरपशु जैसे विचित्र जीव और भी बहुत कुछ है पढ़ने को जो आपको उपन्यास में नजर आएगा तो ‘अथर्व और मायालोक’ खरीदिए और फिर पढ़कर अपने-अपने अनुभव मुझसे और अन्य पाठकों से जरूर साझा कीजिए।

लाइब्रेरी में काम करने वाले अथर्व का था बस एक ही मकसद था, अपने माता पिता की खोज। और इसी खोज में उसके हाथ लगा एक जादुई लॉकेट। जिसे पाने को बेताब थे कुछ मायावी प्राणी। जो खूँखार जानवरों में तब्दील हो सकते थे।
और फिर माया द्वार से अथर्व जा पहुँचा मायालोक!!!जहाँ चल रहे युद्ध ने इस अनाथ लड़के को बना डाला एक योद्धा।
क्या अथर्व उन जादुई जीवों के पंजों से बच पाया? क्या उसे वह उपने माँ बाप को खोजने में सफल हो पाया?

आप किताब को दिनकर पुस्तकालय , बुक चौपाटी और flydream से प्री बुक करवा सकते है । आप नीचे दी हुई लिंक से संपर्क कर सकते है।

दिनकर पुस्तकालय https://www.facebook.com/110713177126140/posts/330464481817674/?app=fbl

फ्लाईड्रीम पब्लिकेशन

+91 96600 35345 आप इस नम्बर से भी अपनी कॉपी बुक कर सकते है।

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2 thoughts on “छोटी सी मुलाकात : अर्थव और मायालोक के लेखक मनीष पांडे ‘रुद्र ‘के साथ

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