Musafir hindi

किताबो का सफरनामा

पुस्तक शीर्षक: ह्यूमन 2.O

लेखक: सोम जायसवाल

प्रकाशन: सूरज पॉकेट बुक्स ( sooraj pocket book)

पृष्ठ : 157

प्रकार : साइंस फिक्शन उपन्यास

मूल्य: 180 रु

हेलो दोस्तों स्वागत है आप सभी का आपके अपने ब्लॉग मुसाफिरहिंदी में । आज हम जिस किताब की समीक्षा (book review ) करने वाले है उस किताब का शीर्षक है ‘ह्यूमन 2.0’ जिन्हें लिखा है सोम जायसवाल जी ने इनकी यह पहली किताब है जिसे प्रकाशित किया है सूरज पॉकेट बुक ने। लेखक महोदय उतर प्रदेश के गोण्डा जिले के एक छोटे से गांव जफरापुर से आते है इनका जन्म यही

अब हम उपन्यास कला के तत्व कर आधार पर समीक्षा करते है। उपन्यास कला के 6 तत्व माने गए है। 1.कथावस्तु 2. चरित्र चित्रण 3. संवाद 4. वातारण काल 5. भाषा और 6. उद्देश्य

कथावस्तु

ह्यूमन 2.0 विज्ञान और थ्रिलर का मिश्रण उपन्यास है कहानी है भास्कर हाउस की जिनके परिवार के सदस्य रहस्मय तरीके से मौत के घाट उतर रहे है। वही दूसरी तरफ आदर्श श्रीवास्तव नाम के युवा वैज्ञानिक ने एक ऐसी खोज करके प्रकृति के नियम को ललकारा है और भास्कर हाउस से इसका क्या संबंध है इसे जानने के लिए आपको किताब पढ़नी पडेगी। कथानक काफी रोचक है और तेज गति से आगे बढ़ता है। यह किताब पाठक को हर एक पन्ने को पलटने पर मजबूर करती है।

चरित्र चित्रण

ह्यूमन 2.0 में बहुत से पात्र है जैसे बलदेव भास्कर, सुशीला भास्कर, विजय, स्मिता , इंस्पेक्टर आशुतोष वागले, कुणाल, प्रोफेसर दीक्षित, आदर्श श्रीवास्तव, आदित्य आदि आदि । इस कहानी का मुख्य पात्र कौन है यह कहना थोड़ा कठिन है क्योंकि हर पात्र की कहानी को शशक्त करने मे अपनी भूमिका है पर फिर भी मुख्य पात्र को ढूंढने जाए तो स्मिता, आदित्य, आदर्श को मुख्य पात्र की श्रेणी मैं रखा जा सकता है।लेखक महोदय ने पात्र के वर्णन मैं एक जगह छोटी सी गलती भी की है जब प्रोफेसर दीक्षित का भास्कर हाउस मैं आगमन होता है तो लेखक महोदय जी ने पात्र को राज के आशुतोष राणा जैसा बताया इससे पाठको के मन मे यह घर कर जाता है कि यह पात्र वहां से उठाया गया है तो कृपया ऐसा न करें।

संवाद

ह्यूमन 2.0 के संवाद काफी छोटे एवं सारगर्भित है और कथानक को गति देते है । संवादो के माध्यम से कोई फिलॉसफी नही बताई गई है केवल बोलचाल के साधारण स्तर के संवाद है और यह इस कहानी के लिए उचित भी था । हाँ लेखक ने अपनी बात भी संवादो के माध्यम से कोशिश की है ।

वातारण काल

वातावरण काल अर्थात कहानी किस समय मैं चल रही है तो ह्यूमन 2.0 के कथानक का समय आज के समय का है (कोरोना से पहले का ) हा बीच बीचमे कहानी अवश्य फ्लैशबैक मैं चलती है पर उसमे लेखक ने समय नही दिखाया।

भाषा और उद्देश्य

ह्यूमन 2.0 उपन्यास की भाषा हिंदी की आम बोलचाल की भाषा है ज्यादातर वर्णात्मक शैली का उपयोग किया गया है तो कहानी को गति देने के लिए संवाद शैली उपयोग की है।

अब बात करते है उद्देश्य की तो लेखक ने मनोरंजन के साथ साथ प्रकृति और विज्ञान की समस्या को भी उजागर किया है कि किस तरह विज्ञान प्रकृति का हास् कर रही है।

समापन

उपर दिए गए सभी तत्व पर सोम जायसवाल की प्रथम कृति ह्यूमन 2.0 खरी उतरती है । और इस तरह के विषय पर लिखने के लिए सोम जायसवाल जी को धन्यवाद और आगे भी इस तरह की रचना करते है इसकी शुभकामनाएं औऱ ऐसे विषयों को प्रोत्साहन और पाठकों तक पहुँचाने के लिए सूरज पॉकेट बुक का धन्यवाद ।

इस किताब को आप http://amazon.in और सूरज पॉकेट की अपनी वेबसाइट http://www.soorajbooks.com/shop से खरीद सकते है।

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