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हैल्लो दोस्तों, आज तक हमने फ़िल्म film और नावेल रिव्यूज़ के बारे में देखा लेकिन आज हम बात करेंगे उन फिल्मों और नॉवेल की कहानी के रचयिता यानी कि एक लेखक के बारे में। एक ऐसे लेखक जिनकी जिंदगी अक्षय कुमार ( akshay kumar ) के पनौती वाले रोल से कुछ कम नही थी, जिन्होंने अपने जीवन में बचपन से लेकर शादी होने तक रेजेक्शनों कि बौछार देखी। इतने रिजेक्शन के बाद शायद ही कोई इंसान ऐसा हो जो हिम्मत जुटाकर उठ पाए और ये उन्ही चुनिंदा साहसी इंसान में से एक थे जिन्होंने रेजेक्शनों को ठुकराया और महेनत करते गए और दुनिया के सबसे फेमस हॉरर लेखक बने। आज हम बात करने वाले है अमेरिका के एक महान लेखक जिनकी लगभग 350मिलियन से भी ज्यादा प्रतियाँ बिक चुकी है, जिन्होंने 200 से भी ज्यादा शार्ट स्टोरीज़ लिखी है 62 नॉवेल लिखी है, जिनका नाम है “stephen king” – ध किंग ऑफ डार्क हॉरर।

स्टीफन किंग का जन्म 21 सितंबर 1947 में पोर्टलैंड में हुआ था। उनका पूरा नाम स्टीफन एडविन किंग है। जो एक जाने माने हॉरर, रहस्य, विज्ञान, गल्प व फंतासी शैली के लेखक है। जिनकी कहानियों पर आगे चलकर के टीवी सीरीज़, मिनी सीरीज़ व फिल्मे बनी। लेकिन कहते है ना कि इतना कुछ हासिल करना आसान नहीं है। जिंदगी ने उनके साथ बड़ी बेरुख थी जब वो 2 साल के थे तब उनके पिता एडविन किंग घर छोड़ कर चले गए। उनके जाने के बाद उनकी माताजी ने ही उनको पालपोष कर बड़ा किया। उनकी आर्थिक स्थिति खराब थी। वे मेथोडिस्ट के विचारों के साथ बड़े हुए। बचपन से ही उनको लिखने का बड़ा शोख था लेकिन बदकिस्मती से वे हर बार रिजेक्ट हो जाते लेकिन फिर भी उन्होंने कभी लिखना नही छोड़ा। माना जाता है कि उन्होंने रजेक्शन्स पेपर को एक कील पर टाँग रखा था एक दिन ऐसा आया कि रिजेक्शन पेपर के वजन से वो कील दीवार से बाहर आ गयी। इतना होने के बावजूद उन्होंने हौसला बनाये रखा और वे लिखते गए।

स्टीफन जब छोटे थे तो अपने एक दोस्त के साथ खेलने गए थे। तब कुछ ऐसा हुआ कि खेलते खेलते वो बच्चा चलती ट्रेन के बीच में आ कर मर गया। इस घटना को किंग ने अपनी आँखों से देखा जब वो छोटे थे। माना जाता है कि किंग ले लेखनी पर भी इस बात का असर है। हालांकि किंग ने कभी ये नही कहा। उन्होंने अपनी पढ़ाई मायन में की और वही की यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हुए। हालांकि आर्ट्स में स्नातक होने के बावजूद उनकी किस्मत ने उनसे धोखा किया और उनको शिक्षक की जॉब न मिल पाई। बाद में उन्होंने अलग अलग काम करके अपना गुजारा किया। हाँ, लिखना उन्होंने बंद नही किया वे शॉर्ट स्टोरीज़ लिखा करते थे। शुरुआत में उन्होंने मेन्स मेगेज़ीन में अपनी शॉर्ट स्टोरीज़ भेजी। 1971 में स्टीफन किंग की शादी टैबिथा से हुई। वे भी एक नॉवेलिस्ट थी और शिक्षक भी। किंग ने टैबिथा के मदद से उसी के टाइप राइटर में अपनी कहानी लिखना चालू रखा।

एक दिन स्टीफन ने दो तीन पेज लिखे लेकिन अब उनका हौसला क्षीण होता चला था जिसके चलते उन्होंने वो कागज डस्टबिन में फेंक दिए। खुशकिस्मती से दसरे ही दिन वो कागज टैबिथा को मिल गए। उसने वो पढा और स्टीफन को उस कहानी को आगे और लिखने के लिए प्रेरित किया। स्टीफन ने भी उनकी बात का मान रखा और स्टोरी को आगे लिखा ये वही स्टोरी है जो आगे जा कर एक फेमस नॉवेल बनी “कैर्री” जो कि पब्लिशिंग हाउस डबलडे द्वारा प्रकाशित की गई और यही से स्टीफन को एक्सेप्टन्स का लाइसेंस मिल गया जिसके बाद उन्होंने कभी रिजेक्शन को फेस नही किया और आगे बढ़ते चले। कैरी को 4 लाख डॉलर में खरीद लिया गया।

उनकी बेहतरीन कृतियों के बारे में देखे जो ऑल टाइम हिट है और जिन पर फ़िल्म भी बनी है।”ध शाइनिंग”, “जेराल्डस गेम्स”, “कैरी”, “क्युज़ो”, “मिज़ेरि”।

स्टीफन ऐसे लेखक है जिनको अनगिनत अवार्ड्स मिल चुके हैं। जैसे कि “ब्रेम स्टोकर अवार्ड”, “वर्ल्ड फेंटेसी अवार्ड”, “ब्रिटिश फंतासी सोसाइटी अवॉर्ड”, “मैडल फ़ॉर डिस्टिंगुइश कंट्रीब्यूशन तो अमेरिकन लेटर”, “ग्रैंड मास्टरी अवार्ड”, “नेशनल मैडल ऑफ आर्ट्स”।

यह सब जान कर आप समझ ही चुके होंगे कि वे कितने महान लेखक है। साथ ही उनके जीवन से बहुत कुछ सीखने लायक है सबसे ज्यादा कभी गिव अप न करना।

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