Musafir Hindi

Just another WordPress site

हैल्लो दोस्तों, आज हम एक ऐसे शख्स के बारे में बात करेंगे जो अपने सपने के पीछे इतने भागे की हमारे चहिते कलाकार शाहरुख खानजी (Shahrukh khan) के एक फेमस डायलॉग में फिट होते है जो है “इतनी शिद्दत से तुम्हे पाने की कोशिश की है की हर ज़र्रे ने मुझे तुमसे मिलाने की साजिश की है” आप सोच रहे होंगे की ये आप किस जनाब की बात कर रहे हो तो ये कोई और नही बट फेमस नॉवेल ध अलकेमिस्ट (The Alchemist) के लेखक पौलो कोएलो (Paulo coelho) केबारे में बात करेंगे। एक ऐसा लेखक जिसने अपने सपनो की चाह में बहुत परेशानियां झेली लेकिन आखिरकार उसे उसकी मंजिल ने अपना ही लिया। उनकी यह नॉवेल अलकेमिस्ट इंटरनेशनल बेस्ट सेलर में से एक है जिसका करीब 80 भाषाओं में अनुवाद किया गया है और करोड़ो प्रतियां बिक चुकी है। लगभग 117 देशों में ये नॉवेल पढ़ी जा रही है।

पौलो कोएलो का जन्म 24 अगस्त 1947 में रियो डी जेनेरियो, ब्राज़ील में हुआ था। उनके पिता इंजीनियर थे और माता गृहिणी। जब वे छोटे थे तब उन्होंने पहली बार एक कविता लिखी और स्कूल में उस कविता के चलते पहले नंबर पर भी आए, तभी से मन ही मन पौलो ने ठान लिया कि वो एक लेखक ही बनेंगे लेकिन नियति कुछ और ही चाहती थी वो कहते है ना जो मंज़िल आसान हो तो वो मंज़िल कैसी? उसे कठिन तो होना ही था। तो उनके ये लेखक बनने की चाह पौलो के माता पिता को खली। पौलो के पिता उन्हें अपनी ही तरह एक इंजीनियर बनाना चाहते थे, इसी बात को लेकर पौलो और उनके माता पिता के बीच बहस होने लगी। ये बहस और भी गहरी होती चली गयी जब पौलो उनके परिवार के कैथोलिक विचारो से परे घर से ही बाहर पूरा दिन बिताने लगे। घुघराले बाल,अजीब सी शर्ट व देर रात को घर आना। धीरे धीरे पौलो के माता पिता को लगने लगा कि उनके बच्चे को कोई मानसिक तकलीफ है जिसके तहत उन्होंने पौलो को महज 17 साल की उम्र में मेंटल इंस्टीट्यूशन में भर्ती कर दिया।

पौलो ने 2 से 3 बार उस मेंटल इंस्टीट्यूशन से भागने की कोशिश भी की लेकिन असफल रहे। बाद में 20 साल की उम्र में उन्होंने मेंटल इंस्टिट्यूशन को अलविद्दा किया और अपनी माता पिता की बात मान लॉ कॉलेज में दाखिला लिया। लेकिन ये तो उनकी मंज़िल नही थी तो एक साल बाद उन्होंने कॉलेज छोड़ दी और अपना जीवन एक हिप्पी की तरह बिताने लगे। उन्होंने कई जगहों पर मुसाफरी की जैसे साउथ अमेरिका,मेकशिको, नोर्थ आफ्रिका, यूरोप और इसी बीच उनको ड्रग्स लेने की आदत पड़ गयी। बाद में ब्राज़ील लौटने के बाद उन्होंने बतौर गीतकार काम करना शुरू कर दिया।

1974 में कोएलो को सैनिक सरकार ने गिरफ्तार भी किया था इस बिनाह पर की उनके गीत वामपंथी विचारो से प्रभावित है। उसके बाद कोएलो ने पत्रकार,अभिनेता,नाट्यनिर्देशक,गीतकार के तौर पर भी काम किया। 1980 में कोएल्हो की शादी आर्टिस्ट क्रिश्टिना से हो गयी।बाद में 1986 में पौलो शेंटीआगो डी कॉम्पोसेलेटा में 500 माईल से ज्यादा पैदल यात्रा की उस यात्रा के अनुभव पर उन्होंने ध पिल्ग्रिमेज लिखी जो कि सेल्फ डिस्कवरी पर आधारित है।

उनके लेखन करियर के बारे में थोड़ा जाने तो उनको भी असफलता का स्वाद चखना पड़ा था। 1982 में उनकी पहली किताब “हेल अर्चिवस” पब्लिश हुई थी जो इतनी असरकारक न हुई और फ्लॉप हो गयी। उसके बाद एक किताब 1986 में आई लेकिन वो भी अपना कमाल न दिखा पाई। उसके आबाद आयी अलकेमिस्ट। जी हाँ ये वही अलकेमिस्ट है जो 117 से भी ज्यादा देश के लोगों ने पढ़ी है लेकिन वो भी शुरुआत में फ्लॉप रही। जब यह नॉवेल पहली बार छपी थी तो इसकी एक भी कॉपी नही बिकी थी। महीनों बाद उसकी सिर्फ दो प्रतियाँ ही बिकी लेकिन इन्ही दो कॉपी ने पौलो की लेखन करियर की रफ्तार बढ़ा दी। एक दिन पौलो को अमेरिका के एक बड़े प्रकाशक की चिट्ठी आयी जिन्होंने ये अलकेमिस्ट खरीदी थी और उन्हें यह बुक बेहद पसंद आई है। उनका कहना था कि इस बुक ने उनके अंतर्मन को झकजोर के रख दिया है। जिससे वे इस बुक को प्रकाशित करना चाहते है। जिसके बाद ध अलकेमिस्ट और पौलो को पूरी कहानी पलट गई और पूरी दुनिया मे बेस्ट सेलर बनी।

अलकेमिस्ट के बाद लेखक ने कभी पीछे मुड़कर नही देखा और 2 साल के अंतराल पर दुनिया को नॉवेल देते रहे। जिसमे “ब्रीड़ा”, “ध सुप्रीम गिफ्ट”, “वोलकैरीज़”, “मकतब”, “ध फिफ्थ माउंटेन जैसी कृतियां शामिल हुई।

तो दोस्तो हमने इस बायोग्राफी से सीखा की अगर हम सपना देखे तो एक दिन उसे जरूर पूरा कर सकेंगे। भले ही देरी हो सकती है लेकिन अगर महेनत करे तो मंजिल जरूर आपके कदम चूमेगी। धन्यवाद।

Leave a Reply

Your email address will not be published.