Musafir hindi

किताबो का सफरनामा

आज से कई वर्षों पहले धीरनगर नामक नगर हुआ करता था वह नगर बेहद ही सुंदर और वहाँ के लोग सुख समृद्धि से अपना जीवन व्यतित करते थे। इस सबका श्रेय उस नगर के राजा धीरसेन को जाता था। धीरसेन अपने नगर का बेहद ही लोकप्रिय शाशक था। उनके दो बेटे थे। बडे बेटे का नाम सिद्धार्थ और छोटे बेटे का नाम रुद्रसेन था। वे सब बेहद ही खुश थे पर एक दिन रानी स्वर्ग सिधार गई। दोनों बेटो पर से मातृत्व की छाया छीन गई। दोनों राजकुमार छोटे होने के कारण उनकी परवरिश के लिए राजा धीरसेन ने दूसरा विवाह किया और दोनों राजकुमारों के लिए एक नई माँ ले आये। शुरुआत में सब ठीक चला पर जब दूसरी रानी गर्भवती हुई तब उसे अपने होने वाले बच्चे के भविष्य की चिन्ता होने लगी। उसके मन में यह लालच घर कर गई कि उसकी होने वाली संतान ही राजगद्दी का वारिस बने पर उसकी इस लालच में रोड़ा बन रहे थे वे मासूम राजकुमार। उनके होते हुए उसके आनी वाली संतान कभी राजा नही बन पाएगी इसलिए रानी ने राजकुमार विरुद्ध षड्यंत्र रचा और उसका शिकार बने वे दोनों मासूम राजकुमार रानी ने राजा के सामने यह सिद्ध कर दिया कि दोनों राजकुमार ने रानी एवं उसके आने वाले बच्चे को मारने की कोशिश की। यह सब जानकर राजा ने दोनों राजकुमारों को देशनिकाल की सजा सुनाई।
अगले दिन दोनो राजकुमारों को एक एक अश्व दे दिया गया और उसे राज्य की सीमा से बाहर कर दिया गया। दोनों राजकुमार बहोत ही दुखी हुए उन्होंने अपने पिता को बहोत ही समजाने की कोशिश की की उन्होंने ऐसा कुछ नही किया पर वे इसमें नाकाम रहे। वे पूरे दिन घोड़े पर सवारी करते रहे शाम को उन्होंने एक घने पेड़ के नीचे आशय लिया भूख लगी थी पर खाने को कुछ न था इस वजह से वे उसी पेड़ के नीचे सो गए। आधी रात को अचानक राजकुमार सिद्धार्थ की आँख खुली तो वे चकित हो गए क्योकि उस पेड़ के डाल पर दो पक्षी इन्सानी भाषा में एक दूसरे से बात कर रहे थे। पहले तो उसे यह सपना लगा पर फ़िर उसे यकीन हुआ कि यह हकीकत है और वे चुपचाप उन पक्षियों की बाते सुनने लगा।
पहला पक्षी : तुजे पता है जो भी मनुष्य मेरा सेवन करेगा वे दूसरे ही दिन बड़े से साम्राज्य का राजा बनेगा ।

दूसरा पक्षी : अच्छा मेरा भी जो मनुष्य सेवन करेगा वे जब भी छीकेगा तब उसकी नाक से एक सोने की गेंद निकलेगी
यह सारी बाते राजकुमार सिद्धार्थ सुन रहा था और मौका पाकर उसने दोनों पक्षियों का शिकार कर लिया और वे फिरसे सो गया तभी उसी पेड़ में से एक विषधारी नाग निकला और उसने उन मरे हुए पक्षियों पर अपना ज़हर फुक दिया। अगली सुबह दोनों राजकुमार उठे और राजकुमार सिद्धार्थ ने अपने भाई को पिछली रात की घटना के बारे में बताया। राजकुमार रुद्र भी विस्मय हो गया। उन दोनों भाईयों ने मिलकर पक्षियों का भोजन बनाकर सेवन किया विषयुक्त पक्षी राजकुमार रुद्र के हिस्से में आया इसी लिए वे तड़पकर वही गिर पड़े और उनके मुखसे सफेद जाग निकलने लगा यह सब अचानक देख सिद्धार्थ एकदम भौचक्के रह गए वे अपने भाई को बचाने का प्रयास करते उससे पहले ही रुद्र का शरीर बेजान हो गया। सिद्धार्थ विलाप करने लगा पर जब वह संभला तब उसने अपने भाई की अंतिम क्रिया करने के लिए लकड़ी इक्कट्ठा करने गया तभी पीछे से एक सौदागर उस रास्ते से गुजरा। बच्चें के शव को देखकर उसके पास दौड़ा चला आया उसने उसकी जांच की और आसपास से जड़ीबूटी तोड़कर उसके शरीर पर लगाई तो राजकुमार रुद्र का शरीर फिरसे ठीक होने लगा पर पूरी तरह से इलाज कराने के लिए उसे अपने नगर ले जाना जरूरी था उसने आसपास देखा तो कोई नही था उसने उस बालक को उठाया और अपने साथ ले चला। जब राजकुमार सिद्धार्थ लकड़िया इक्कट्ठा करके वापिस लौटा तो अपने भाई का शव न देखकर वो परेशान हो गया उसने ढूँढने का प्रयास किया पर असफलता हाथ लगी। फिर उसने सोचा कि कोई जंगली जानवर उसके भाई का शव ले गए वे बहुत रोया और किस्मत का खेल समजकर आगे बढ़ गया और चलते चलते वे एक नगर के द्वार पर पहोचा और जैसे ही उसने प्रवेश किया उस नगर के वासियों ने उसे उठा लिया और शंख नगाड़े ढोल सब बजाने लगे और उत्सव मनाने लगे जब राजकुमार सिद्धार्थ ने इसका कारण पूछा तो पता चला कि अगली रात को पूर्व राजा का निधन हो गया है और वे निःसंतान होने के कारण दूसरा राजा कोई बन नही सकता था इस लिए नगर वासियो ने यह निश्चित किया कि आज सबसे पहले जो भी इस नगर में प्रवेश करेगा वे ही नगर वासियों का नया राजा होगा। यह सुनकर राजकुमार को पहले पक्षी की बात सही साबित हुई है यह लगा।

दूसरी तरफ सौदागर राजकुमार रुद्र को लेकर अपने नगर पहुँचा और तुरन्त ही उसका इलाज करवाया और राजकुमार रुद्र कुछ दिन बाद एकदम स्वस्थ हो गया तो सौदागर ने उसे अपने घर लौट जाने को कहा पर राजकुमार ने उसका कोई घर नही है यह बताया और तभी राजकुमार को छिक आ गई और छीकते ही उसकी नाक से सोने की गेंद निकली यह देख सौदागर चकित हुआ और इसके पीछे का कारण पूछा तो रुद्र ने बताया कि वह जब भी छीकेगा तब इसी तरह उसकी नाक से सोने की गेंद निकलेगी। यह सुनकर सौदागर की लालच जगी और उसे अपने साथ रख लिया उसके बदले उसे रोज 10 सोने की गेंद देनी पड़ती।

धीरे धीरे समय बीतता गया और दोनों भाई प्रगति के शिखर पर चढ़ते गए एक तरफ राजकुमार सिद्धार्थ सम्राट विक्रमादित्य बन गया और उसने अपने अपमान एवं भाई की मौत का बदला लेने के लिए अपने सौतेले भाई के नगर को भी हराकर फिरसे उस नगर का राजा बन गया तो दूसरी तरफ राजकुमार रुद्र सौदागर वीरसेन बन गया। राजकुमार रुद्र ने उसी सौदागर की बेटी सुनैना से विवाह किया और पहली रात उसने अपनी सारी सच्चाई अपनी बीवी के सामने रख दी। तो राजकुमार सिद्धार्थ का भी विवाह सकुल नगर की राजकुमारी संध्या से हुआ। संध्या के महारानी बनने के बावजूद भी उसमें राजकुमारी की चंचलता मौजूद थी और इसी कारण हर रोज महारानी संध्या को सोने से पहले कहानी सुनने की आदत थी। राजा उसकी खूबसूरती पर वारी था इसलिए उसने उसकी नादानियों को नजरअंदाज करके यह आदेश दिया कि राजमहल के सारे विद्वानों एवं राज दरबारियों को महारानी को कहानी सुनानी होगी। राजा के आदेश के आधीन होकर सबने कहानियाँ सुनाना शुरू किया पर समय के जाते राजमहल की कहानियों का संग्रह खाली हुआ पर सम्राट सिद्धार्थ ने अपनी रानी को खुश रखने के लिए नगर में यह ढँढेरा पिटवाया की जो भी महारानी को कहानियाँ सुनाएगा उसे 100 स्वर्ण मुद्राएं भेट में दी जाएगी।

दूसरी तरफ सौदागार वीरसेन ने अपनी बीवी के लिए एक कींमती हार खरीदकर भेट दी पर सौदागरनी ने वह हार गुमा दिया और जब यह बात सौदागर वीरसेन को पता चली तब उसने अपनी बीवी को खरी खोटी सुनाई पर सौदागरनी भी सामने झपट पड़ी दोनों में बहोत कहासुनी हुई तब सौदागर वीरसेन ने यह कहकर उसे चुप करा दिया कि पैसे कमाना इतना आसान नही है कमाकर दिखाओ फिर सामने बहस करना। सौदगरनी चुप तो हुई पर यह बात उसके दिलपर लग गई और उसने भी मन ही मन सोच लिया कि वो अपने पति को पैसे कमाकर दिखायेगी तभी उसे महारानी को कहानी सुनाने वाली एवं 100 स्वर्ण मुद्राएं वाली बात मालूम हुई। उसने रानी को कहानी सुनाकर पैसे कमाने का तय किया अगले दिन वो राजमहल पहुँची और रानी के सामने बैठ गई। सौदगरनी ने कहानी सुनाना शुरू किया पर वे सारी कहानी महारानी ने पहले से सुन रखी थी और रानी ने उसे नई कहानी सुनाने को कहा जब भी सौदगरनी कहानी सुनाना शुरू करती महारानी उसे नई कहानी सुनाने को कहती। अब सौदागरनी को यह लगने लगा कि उसके 100 स्वर्ण मुद्राएं कमाने का सपना बस सपना ही रहेगा पर तभी उसे अपने पति द्वारा पहली रात सुनाई गई अपनी जीवन की कहानी को उसने रानी के सामने कहानी के रूप में सुना दी और रानी यह कहानी सुनकर इतनी खुश हुई कि उसने 100 मुद्राओं के बदले 1000 मुद्राएं भेट की और सौदागरनी अपनी भेट लेकर खुशी खुशी अपने घर चली गई।

उसी रात महारानी भी बहोत ही खुश थी उसने वही कहानी को महाराज को सुनाने का फैसला किया और जब सम्राट अपने होजरे में पहुँचे तो रानी ने उन्हें कहानी सुनाने की बात की और सम्राट ने अपनी बीवी का दिल रखने के लिए वो कहानी सुनी और कहानी सुनते ही वे एकदम चकित हो उठे। उन्होंने तुरन्त ही पूछा यह कहानी आपने कहाँ सुनी ? तब महारानी ने सौदगरनी का नाम लिया अगले दिन सौदगरनी को दरबार में उपस्थित होने का आदेश सौदागार के घर आया। सौदागरनी घबरा गई पर राजा के हुक्म को नजरअंदाज भी नही किया जा सकता था पर तब सौदागार वीरसेन घर पर नही था सौदागरनी राज दरबार में उपस्थित हुई। सम्राट सिद्धार्थ ने सौदागरनी से पूछा यह कहानी किसने उन्हें सुनाई तो उसने अपने पति का नाम लिया और यह कहानी नही बल्कि हकीकत है। उसके पति ने यह बताया पर सम्राट को यकीन नही हुआ क्योंकि उसके आँखों के सामने उसका भाई मरा था। इसलिए उसने आदेश दिया कि सौदागार वीरसेन जहाँ भी हो उसे तुरंत ही राज दरबार में पेश किया जाए। राजा के सैनिकों ने वीरसेन को दूसरे गाँव से पकड़कर राज दरबार में पेश किया वीरसेन अपनी गिरफ्तारी से काफी हैरान था, उसे कुछ समझ में ही नही आ रहा था कि उसे किस गुनाह के लिए यहाँ लाया गया है राजा उसे घूर घूर के देख रहे थे तभी वीरसेन को जोरसे छिक आ गई और उसकी नाक से सोने की गेंद निकली यह देखकर राजा तुरंत ही अपने सिंहासन से उठ खड़ा होकर अपने भाई से गले लग गया अभी भी वीरसेन कुछ समझा नही था। उसके चेहरे के हाव भाव देख के सम्राट समझ गया उसने सारी बात वीरसेन को बताई जब सम्राट ने अपनी बात पूरी की तब वीरसेन ने अपने भाई को गले लगा लिया।
Aryan suvada
( मेरी नानी की मम्मी के द्वारा सुनाई गई )

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