Musafir hindi

किताबो का सफरनामा

वक़्त सबका बदलता है मैंने देखा है,

मैंने वक़्त के आगे हालात को बदलते देखा है ।

कभी शराफत की ज़िंदगी के जो आदर्श हुआ करते थे,

मैंने चेहरे से उनको वो नक़ाब उतरते देखा है।

ज़रूरत की बात है इस मतलबी दुनिया मे सभी की,

मैंने बेवजह अश्को को नही बेहते देखा है ।

कभी पेड़ को मिटाकर जिसे बनाया गया था,

मैंने उसी कागज को आज नाव बनते देखा है

रिश्ता हमारा ताउम्र न रह पाया तो क्या,

मैंने चांद को भी अंधेरे से बिछड़ते देखा है ।

इल्तजा है दोस्तो मुझे जलाना नही मरने के बाद,

मैंने लाशो को भी उठकर बैठते देखा है ।
– राधेय

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