Musafir hindi

किताबो का सफरनामा

तू नही आया सनम तेरा पैग़ाम आया था ,

तुझसे हुए जो दूर, तेरा ख्याल आया था।

रो के गुजार लेते है राते, दिन को कहा चैन आना था,

जो होना था हुआ , हिस्से मैं इंतजार आया था ।

वही बिखरे रहे किस्से जिसे सब प्यार कहते है ,

मेरी तो आशिक़ी का बस यही अंजाम आया था।

खुदा से पूछ बैठा तब कसूर मेरा बतादें तू ,

रहा खामोश वो भी बस,क्योकि यह सवाल आया था ।

हुए थे रूबरू दोनों हकीकत और सपने जब,

मेरे अंदर तो जज्बातो का एक सैलाब आया था ।

कागज भी रो रहा था गजल जब लिखी राधेय,

हस्ता हुआ वो चेहरा जब याद आया था।

– राधेय

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